कन्‍या भूण हत्‍या

कुछ कारण हैं । जो लोग कन्‍या भूण समापन करते हैं , मेंरे दृष्टि कोण से इसमें कुछ भी गलत नहीं है । समस्‍यायें होंगी तो लोग उसका रास्‍ता  भी निकालते हैं । आज का हाल यह है कि एक लड़की की शादी में अमूमन कम से कम 6 लाख रूपये से अधिक का खर्च आता है । जिसे एकदम निम्‍न श्रेणी का किफायती विवाह कह सकते हैं । क्‍या एक साधारण , सामान्‍य व्‍यक्ति इस खर्च को उठानें की हिम्‍मत जुटा सकता है, जिसकी आमदनीं छह से दस हजार रूपये महीनें हो । ऐसा व्‍यक्ति क्‍या खायेगा, क्‍या पहनेंगा, कैसे अपनें जीवन को  बचायेगा, फिर इस दुंनिया में क्‍या इसी लिये आये हैं कि केवल तकलीफें झेलो और आराम मौज मस्‍ती के लिये सोचो मत । एक कन्‍या को पहले जन्‍म दीजिये,फिर उसकी परवरिश कीजिये । परवरिश कोई ऐसे ही नहीं हो जाती, इसमें तिल तिल करके कितनीं रकम और कितना पैसा खर्च होता है । फिर पढ़ाई मार डालती है । इस मंहगाई के दौर में किस तरह की मंहगी पढ़ायी है, यह किसी से छुपा नहीं है । वर्षों तक  पढायी होती है कितना  पैसा खर्च होता है । लडकियों की सुरक्षा करना भी एक जहमत भरा काम है । पता नहीं कब किसकी बुरी नज़र लगे , कुछ भी शारीरिक अथवा यौन उत्‍पीड़न,  हो सकता है । फिर अंत में लडंका ढूंढिये और शादी करिये । यह कहना और लिखना   जितना आसान है, ऐसा है नहीं ।पढायी तक तो लड़की आपके पास रही , यहां तक तो आपका नियंत्रण रहा । जब योग्‍य वर की तलाश में निकलेंगें तब आटे दाल का भाव पता चलता है  

कन्‍या भ्रूण समापन एक प्रकार की सामाजिक समस्‍या है, जो पूर्णतया धन से जुड़ी है, लेकिन इसके साथ साथ कुछ दूसरे भी कारण हैं । समाज व्‍यक्तियों से बनता है । व्‍यक्तियों के सामनें समस्‍यायें होंगी तो लोग उसका समाधान भी ढूंढेंगे । इन्‍हें जो अपनें हित का समाधान मिलता है तो , वे उसे अपनानें में जरा भी नहीं हिचकिचायेंगे । आज का समाज झंझट पालना कतई नहीं चाहता । मां बाप जानते हैं कि लड़की पैदा करनें में सिवाय नुकसान के कोई फायदा नहीं है । यह विशुद्ध हानि और लाभ के गणित पर आधारित सस्‍वार्थ एकल दर्शन है ।

आज आप शादी करनें जाते हैं तो कम से कम 6 लाख रूपये दहेज में खर्च होगा । यह सबसे किफायती शादी होगी । आज के दिन , जो कन्‍या पैदा होगी उसका विवाह यदि औसत में 30 वर्ष की उम्र में करेंगें तो दहेज की क्‍या हालत होगी । एक अन्‍दाज के मुताबिक यह रकम 40 लाख से साठ लाख के आसपास होंनी चाहिये । क्‍योंकि जिस रफ्तार से मंहगाई बढ़ रही है उससे तो यही स्थिति बनती है । आपके यहां यदि एक लड़की है तो प्रतिवर्ष आपको सवा लाख से लेकर दो लाख रूपये बचानें पड़ेंगे , लडकी के शादी होंनें तक । यह रकम कहां से लायेंगे , यह सोचना आपका काम है । 

कन्‍या भ्रूण समापन एक प्रकार की सामाजिक समस्‍या है, जो पूर्णतया धन से जुड़ी है, लेकिन इसके साथ साथ कुछ दूसरे भी कारण हैं । समाज व्‍यक्तियों से बनता है । व्‍यक्तियों के सामनें समस्‍यायें होंगी तो लोग उसका समाधान भी ढूंढेंगे । इन्‍हें जो अपनें हित का समाधान मिलता है तो , वे उसे अपनानें में जरा भी नहीं हिचकिचायेंगे । आज का समाज झंझट पालना कतई नहीं चाहता । मां बाप जानते हैं कि लड़की पैदा करनें में सिवाय नुकसान के कोई फायदा नहीं है । यह विशुद्ध हानि और लाभ के गणित पर आधारित सस्‍वार्थ एकल दर्शन है । इसमे कतई दो राय नहीं हो सकती है कि इस समस्‍या की मूल में आर्थिक अवस्‍था, सुरक्षा से जुड़े पहलू , अधेड़ अवस्‍था या बृद्धावस्‍था की दहलीज पर घुसते ही मानसिक और शारीरिक टेंशन की समस्‍या , अनावश्‍यक भागदौड़ , लड़के  या योग्‍य वर ढूंढनें की शरीर और मन दोंनों तोड़ देनें वाली कवायदें , भागदौड़ , जब तक लड़का न मिल जाय तब तक का मानसिक टेंशन , बेकार का सिद्ध होंनें वाले उत्‍तर , जलालत से भरा लोंगों का , लड़के वालों का व्‍यवहार झेलकर हजारों बार , लाखों बार यही विचार उठते हैं कि लडकी न पैदा करते तो बहुत अच्‍छा  होता । स्‍वयं को अपराध बोध होंनें लगता है कि बेकार में लड़की पैदा की , एक जलालत और अपनें सिर पर ओढ़ ली । शांति , चैन , मन की प्रसन्‍नता सब सब नष्‍ट हो जाती है । आप जो काम कर रहें हैं , उसमें भी आप पिछड़तें हैं । पास , पडोंस , हेती , व्‍योवहारी , मित्र आदि कहनें लगते हैं कि लड़की क्‍या कुंवारी ही घर पर बैठाये रक्‍खेंगे । आज आप शादी करनें जाते हैं तो कम से कम 6 लाख रूपये दहेज में खर्च होगा । यह सबसे किफायती शादी होगी । आज के दिन , जो कन्‍या पैदा होगी उसका विवाह यदि औसत में 30 वर्ष की उम्र में करेंगें तो दहेज की क्‍या हालत होगी । एक अन्‍दाज के मुताबिक यह रकम 40 लाख से साठ लाख के आसपास होंनी चाहिये । क्‍योंकि जिस रफ्तार से मंहगाई बढ़ रही है उससे तो यही स्थिति बनती है । आपके यहां यदि एक लड़की है तो प्रतिवर्ष आपको सवा लाख से लेकर दो लाख रूपये बचानें पड़ेंगे , लडकी के शादी होंनें तक । यह रकम कहां से लायेंगे , यह सोचना आपका काम है ।   

समस्‍या का समाधान-

 1- कन्‍या भ्रूण हत्‍या की समस्‍या को रोकनें का समाधान केवल व्‍यक्तियों की इच्‍छा पर निर्भर है । मां बाप क्‍या चाहते हैं यह सब उनके विवेक पर छोड़ देना चाहिये । मेंरी सलाह यह है कि यदि पहला बच्‍चा लड़की भ्रूण है , यह पता चल जाय , तो इस पहले भ्रूण का समापन न करायें , किसी भी हालत में । पहले गर्भ का समापन करानें से स्‍थायी बन्‍ध्‍यत्‍व की समस्‍या हो सकती है या किसी गम्‍भीर प्रकार की यौन जननांगों की बीमारी , जो स्‍वास्‍थ्‍य को लम्‍बे अरसे तक बिगाड़ सकती है । प्रथम गर्भ तो किसी हालत में न गिरवायें । यह खतरनाक है ।  

2- आजकल लिंग परीक्षण करना सरल है । यह मां बाप की मर्जी पर र्निभर करता है कि वे कन्‍या पालना चाहते हैं । अगर नहीं चाहते तो इसका समापन कराना ही श्रेयस्‍कर है । अभी समापन कराना सस्‍ता है । एक कन्‍या का पालन जरूर करें, यदि वह प्रथम प्रसव से हो ।

3- यह न विचार करें कि आप के इस कार्य से लिंग का अनुपात कम हो रहा है या अधिक । यह एक सामाजिक और आर्थिक समस्‍या से जुड़ा हुआ पहलू है । इस समस्‍या का समाधान भी समाज को ही करना पडेगा । इसका ठेका आपनें अकेले नहीं ले रखा है ।

 4- लिंग अनुपात की गड़बड़ी से समलैंगिक विवाह को प्रोत्‍साहन मिलेगा  । लड़का , लड़का से और लड़की, लड़की से शादियां करेंगी तो दहेज का प्रश्‍न नहीं होगा । ऐसे ब्‍याह से अपनें देश की जनसंख्‍या की समस्‍या भी कुछ सीमा तक कम होगी ।

5- यदि बाइ-द-वे किसी मजबूरी से कन्‍या जन्‍मना ही चाहें जो जरूर जन्‍म दें । यदि आपको कन्‍या को पालनें पोषनें में दिक्‍कत आ रही तो किसी सुपात्र व्‍यक्ति , निसंतान को कन्‍या जन्‍मतें ही दे दें । यह बहुत बड़ा दान है ।    


६- वर्तमान मे ऐसे बहुत से दम्पत्ति है जिनके कोई भी बच्चे किसी कारण अथवा शारीरिक विकृति के कारण से नही हुये है / ऐसे बहुत से दम्पत्ति है जो चाह्ते है कि लड़्का न सही कोई लड़्की ही मिल जाये और वे किसी कन्या को पालना चाहते है / आप कन्या भ्रूण हत्या न करे क्योंकि किसी जीव को मारना धार्मिक और नैतिक स्तर पर कतई उचित नही ठहराया जा सकता है / सबसे अच्छा यही होगा कि नि:सन्तान दम्पत्तियों को कन्या शिशु जन्मते ही शिशु-दान कर दें /

७- लोक लाज के भय से शायद बहुत से दम्पत्ति इस तरह का कार्य सार्वजनिक तौर पर न कर सकें , इसके लिये एन०जी०ओ० जैसे सन्गठन और सामाजिक सनगठन जन्ता द्वारा स्थापित किये जायें जहां क्न्या जन्मते ही उन नि:सन्तान दमपत्तियों को दिया जा सके जो कन्या की परवरिश करने में सक्षम हों /

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140 thoughts on “कन्‍या भूण हत्‍या

    • I agree with Parimal. It’s a very narrow minded perspective. Please broaden your thinking and you will see better solutions to tackle the problems. Bhrunhatya ye koi rasta nahi hua. rather talk about strenghthing a girl child and women. Purush ki mansikta badane ka prayas kijiye, aurat apne aap surakshit ho jayegi. Har koi jimmedaari zatak dega to kaise chalega?

  1. according to me this person is right in a way now common yaar its practical if parents give birth to a child whther a boy or a girl they would obviously want their child to be hppy to give him watever their child wants …. so when a girl child is born they have to save money for her marriage as v r all aware of the bribe system so if we think that way then this person is right in a way …..

  2. ओस की बूंदों सी होती हैं बेटियाँ !
    खुरदरा हो स्पर्श तो रोती हैं बेटियाँ !!
    रौशन करेगा बेटा बस एक ही वंश को !
    दो – दो कुलों की लाज ढोतीं हैं बेटियाँ !!
    कोई नहीं है दोस्तों एक दुसरे से कम !
    हीरा अगर है बेटा तो मोती है बेटियाँ !!
    काँटों की राह पर खुद चलती रहेंगी !
    औरों के लिए फूल ही बोती हैं बेटियाँ !!
    विधि का है विधान या दुनिया की है रीत !
    क्यों सबके लिए भार होती हैं बेटियाँ !!
    धिक्कार है उन्हें जिन्हें बेटी बुरी लगे !
    सबके लिए बस प्यार ही संजोती है बेटियाँ

  3. kanya bhrun hataya pe aaj tak bhut kuch padha par wahhhhhh aaj aapke khalayat to bhut nek jaan padte hain….itne mahaan khyalaat aap laye kha se….

    sharm aani chahiye!!!
    ye kis tarah k wahiyaat upaye yaha bataye gye hain….
    bhrun k hataya kisi bhi karan se ki jaye mahapaap hai, aur is tarah k vichar kripya apne pass rakhe sammaj ko aapke vicharo ki awashykta nai….

  4. ye bilkul theek h, lekin ek sakht kanoon banana chahiye ki har pariwar (yahan pariwar ka matlab miya bibi se h na ki joint faimily) ko ek ladaki jarur paida karni padegi aur uske lalan palan me jo kharch hoga usme sarkar ka yogdan hoga.agar aapke pass pahli ladaki kudrat bhej deti h to aap dusre bachche ke bare me soch samajh kar nirnay le sakte h aur eashi halat me aap bhrun samapan karwa sakte h.aur pahala ladka h to yahan kanya bhrun ki baat nahi h male child ki bari aati h. jara es bare me bhi sochiye. meri shubhkamnayen sare brhamand ke liye h ki yahan sab jode ke sath rahen. Dhanyavad

  5. mujhe ye arcticle ki soch pasand nahi ayi………

    agar kanyaye khatam ho jayegi to Puroshotam Shri Ram kaha kaun peda karega, SIvaji, Maharana pratap, Chandragupt, Swami Vivekanand jaisi santano ko janm dega….. jara sochiye agar Jija Maa na hoti Rani Lakshi Bai Na hoti Ahilya Bai na Hoti to aap es svatantra desh me saans le rahe hote…… or aaj ke samaj me gareeb insan ladkio ko khushi khushi janm de rahe hai kyuki sirf ladkiya hai jo apne Parivar ka jada dhayan rakhti hai samajhti hai, or aaj ke jamane me ghar ke kaam ke sath sath har shetra me agye badh ri hai…… or socold padhe likhe paise wale log ladkiyo ko maar rahe hai kyuki unhe apne parivar ke liye chirag chahiye wahi saas apni poti ko maar ri hai jo swam ek aurat hai or ek aurat se janmi hai…sharam ati hai mujhe yahe dekh ke………… jada jaankari ke satya mev jayte ka pehla episode dekhe…………….tab koi tippani kare……. Jai Hind…

  6. jo kanyayen hai nahi unki hatya ko rokne ke liye hangama kia ja raha hai!!!!!!!!!!!!
    jo astitva me hai unki suraksha, unko bachane ke liye kya nahi sochana chahiye ???

    daily rape, revenge me murder, dahej ke liye na jane kitani kanyaye/mahilayen mari jati hai tab kyo nahi koi unke parents ke liye aage aata hai………..

    aise parivesh me kaun mata-pita chahege ki unke ghar me bacchi aaye……………moreover……women ko hi beta na hone ke liye pratadit kia jata hai…tab sabhi kyo soye rahte hai………us samai kyo nahi koi bolta hai………….mother ke liye beta-beti dono hi ek saman hote hai isliye ma ko dosh nahi dena chahiye………….

    Anathalayo me rah rahi chhoti-2 bachhiyon ka shoshan hota hai tab sare samaj sudharak kaha chale jate hai……………..

    sachmuch kanyaye bachana hai to jo live hai unko bachao pahle, unki suraksha kro. nahi to kanya bhrun hatya ko rokne ke nam sab natak band kar dena chahiye

  7. sry buddy… in this post i dnt agree with you at any of the point… fst thing… ladkiyo ki shadi mein jitna kharcha aana h… agar proper education di jaye… toh they can themselve bear all… n life is not at all only about having luxuries. N yrr padai itani mahangi h toh itne bache paida karne k jarurat hi kya h… jinko k tum thik se pada b na sako…. aur jaha tak sexual abuse ki baat h… guyz are also not free of that… n yogya var ki talash b ladkiya khud hi kar sakti h… all that parents have to do is to be-leave their child… n if a grl is a jhanjat… toh ladko mein mi kam jhanjhat ni hote…. jyada hi hote h… control a guy is far difficult then controlling a gal… n vese b vo ma baap… ma baap banne k kabil hi nai h jo bacho me b apna profit n loss dekhe… they are jst bloody businessmen… n dahej ki sari problem arranged marriges se h… if u are so as said… looking into the solution of problems… pramote love marriges… but i know… ye hona jyada mushkil h… katl krne se… vese b 1000 mese 55 ladke kavare hi marte h… mean galz are on high demand… toh dahej toh ladke valo ko dena chahiye… if they want their son not to die bachlor… :P and this all is sue to the mentality like of yours… and kya bache palna kutte palne jesa h??? k hum kutta palenge ya kutiya… n mann… plz dnt go against the nature… othervise all will be distroyed… jab ladkiyan hongi hi nai… toh… what will only guyz do in this world???

    PS
    i guess you got all the better solution of your problem… :)

  8. Kis tarah ke insaan hein aap jab izzat ki baat aati h, pyar ki baat aati h, mamta dular ki baat aati h tab betiya chahiye. agar uski shaadi ki baat aati h to paise k prati lagav hota h.
    lanat h aap jaise logo p. I suggest instead of killing ur baby, symbol of ur love, u sho uld take a oath that you will find a worthy and eligible groom, who will marry her not for money or social status but for love and will respect her and accept her the way she is.

  9. कोन आजाद हुआ मुल्क मे कातिल के सिवा? क्या हम अब भी कह सकते है कि जंहा नारियो की पुजा होती है, वंहा देवता वास करते है और वह हमारा अपना ही देश है

  10. Kya ho rha he yr ye sb, kyu kar rhe he log ye pap…jara ye to socho, kya kanya bhuran hatya se ,samadhan ho sakta he…is se sirf ek pap apko lgta he jisko apko jindgi bhar jhelna padhta he,log hmesa pap se darte he,to kyu ye mahapap krte he..kya ek ldki ko markar unhe ye lgta he ki unki samasya hal ho gayi, to jara mujhe btao ki kitne logo ki samasya kanya ki hatya se samadhan hui he..hm us ko mar rhe he jiska koh dosh nahi or un ldko ko duniya me ane de rhe he, jo ki ldhkiyo k satg pap kr rhe he..kya ldkiyo ki galti he ki wo ldki he, inme unka kya dosh..jb god khud hme koi tofa de raha he to kyu ham ise accept krne se katraye…ham ye jarur dekh skte he jo kanya bhrun hatya krta he kbhi lyf me khus nahi reh pata..plz stop this mahapap ye kisi samasya ka samadhan nahi he..

  11. ६- वर्तमान मे ऐसे बहुत से दम्पत्ति है जिनके कोई भी बच्चे किसी कारण अथवा शारीरिक विकृति के कारण से नही हुये है / ऐसे बहुत से दम्पत्ति है जो चाह्ते है कि लड़्का न सही कोई लड़्की ही मिल जाये और वे किसी कन्या को पालना चाहते है / आप कन्या भ्रूण हत्या न करे क्योंकि किसी जीव को मारना धार्मिक और नैतिक स्तर पर कतई उचित नही ठहराया जा सकता है / सबसे अच्छा यही होगा कि नि:सन्तान दम्पत्तियों को कन्या शिशु जन्मते ही शिशु-दान कर दें /
    ७- लोक लाज के भय से शायद बहुत से दम्पत्ति इस तरह का कार्य सार्वजनिक तौर पर न कर सकें , इसके लिये एन०जी०ओ० जैसे सन्गठन और सामाजिक सनगठन जन्ता द्वारा स्थापित किये जायें जहां क्न्या जन्मते ही उन नि:सन्तान दमपत्तियों को दिया जा सके जो कन्या की परवरिश करने के सक्षम हों /

  12. ६- वर्तमान मे ऐसे बहुत से दम्पत्ति है जिनके कोई भी बच्चे किसी कारण अथवा शारीरिक विकृति के कारण से नही हुये है / ऐसे बहुत से दम्पत्ति है जो चाह्ते है कि लड़्का न सही कोई लड़्की ही मिल जाये और वे किसी कन्या को पालना चाहते है / आप कन्या भ्रूण हत्या न करे क्योंकि किसी जीव को मारना धार्मिक और नैतिक स्तर पर कतई उचित नही ठहराया जा सकता है / सबसे अच्छा यही होगा कि नि:सन्तान दम्पत्तियों को कन्या शिशु जन्मते ही शिशु-दान कर दें

    ७- लोक लाज के भय से शायद बहुत से दम्पत्ति इस तरह का कार्य सार्वजनिक तौर पर न कर सकें , इसके लिये एन०जी०ओ० जैसे सन्गठन और सामाजिक सनगठन जन्ता द्वारा स्थापित किये जायें जहां क्न्या जन्मते ही उन नि:सन्तान दमपत्तियों को दिया जा सके जो कन्या की परवरिश करने के सक्षम हों /

  13. mere khayal se shadi bhrun hatya ki sahi wajah nahi hai samasya ko samjhne ke liye pehle iski jad tak jana hoga ek shadi main itna kharch nahi aata hai shadi to kisi bhi mandir masjid ya ghar mai bina jyada kharche ke ho sakti hai leki apne desh main dekha jaye to is kharche ke piche sirf ek hi wajah hai aur wo hai “DAHEJ”(DOWERY SYSTEM) . agr dahel na diyaa jaye to shadi pr itna kharach hi na aaye agr desh main ye samasya bhi sulajh jaye ki log dahej lene aur dene par rok lga de to kafi hd tk se samasya sulajh sakti hai ye is samasya ka ek pehlu aur ek samadhan hai dusre pehle hain…..

  14. Betiyon ko padhane me kharcha aayega.BETA toh jaise muft me padhega na..phokat me padhaoge apne bete ko? Chacha ki dukaan hai qa?? …
    Shaadi ke baad BETA laat maar ke bhagayega..toh samajh me aayega..
    Yeh essay bahut hi waahiyat hai.. I hate this..
    Saari ladkiyon ki badduaye milengi yeh essay likhne waale ko..
    Tiriskrit..hain aap jaise sochne waale log..
    Bhaad me jaao..
    WTF,,…

  15. not feeling sorry while saying …i didn”t agreee……..
    aap bas ye bataye ki aap chahte kya hai? kanya bhroon hatya karwana aarthik majboori ka result hai to inhe hone de ya roka jaye?aap shayad poori baat jante hi nahi….only upper middle class and upper class society is actively participating in this job.kam aamdani wala itna afford hi nahi karpata k illegal ultrasound and then is illegal procedure ka kharcha jhel paye…ye samasya samaj me unhi ki den jyada hai jinke paas aarthik sthirta hai…gareeb ne to ladka ladki upar wale ki den hi maane hai..paise wala hi janta hai ki isse bacha kaise jae…..
    so please for god sake ,mamle ki gambheerta samjhe…kanya bhroon hatya kisi bhi lihaj se man ne layak baat nahi….aap dahej ,donations, eve teasing,rape, acid attacks—-ye sab to khatm karne k liye kuch khas kar nahi sakte to laiye ladki ko hi khatm kar le…… wah ji wah…kya samjhana chahte hai pehle khud samjhe….

  16. ………..उत्तर………..मै आपके इस लोड किये गये वीडियो की सराहना हृदय से करता हू / मैने पूरा वीडियो देखा है और इसे मै HOME PAGE पर डालने का प्रयास करून्गा ताकि लोग सुने और अपनी विचार धारा बदले /

    जब से मैने “कन्या भ्रूण हत्या ” के इस ब्लाग मे अपने प्रैक्टीकल और जमीनी हकीकत वाले विचार बताये, बहुत से लोगो ने मुझे बहुत बुरा भला कहा, किसी ने मेरी बहुत निन्दा की तो किसी ने मेरी बात को सराहा, मिलीजुली प्रतिक्रिया रही और मिली / मैने किसी भी बात का बुरा नही माना , उल्टे मुझे खुसी हुयी कि लोगों के अन्दर कन्या भ्रूण हत्या को लेकर कम से कम यह तो चेतना जागी कि इस समस्या पर भी विचार करना चाहिये और इसका समाधान भी निकालना चाहिये /

    मैने इस ब्लाग मे जो कुछ भी लिखा है , वह आज भी जस का तस है और समाज की परिस्तिथियों मे जमीन से लेकर अधर तक कोई भी बदलाव नही आया है /

    मुझे शक है कि लोग अपना नजरिया बदलेन्गे और कन्या भ्रूण हत्या नही करेन्गे , इसकी मुझे कतई कोई उम्मीद नही लगती है / स्तिथि बहुत निराशा जनक है / जब से महिलाओ पर आये दिन बवाल और बलात्कार जैसे मामले बढ रहे है लोग अब नही चाहते कि उनके घर कोई लड़्की पैदा हो /

    जब से मैने ब्लाग लिखा है , शायद यह पहला comment है जो मै लिख रहा हू /

  17. gulshan ji n kapil ji…nice job….badi pyari hai ye choti si jaan…
    chaliye, means..aap female foeticide ko support nahi karte,aisa lagta hai..me khud iske liye apne patients ki councelling karti hu,accha lagta hai jab wo saath dete hai…par jo baat nahi mante ..wo is article k likhe points hi ginate hai…ek aurat pe beta paida karne ka itna burden hota hai k usko apni ajanmi beti hi saare fasad ki jadd lagne lagti hai..n they use to say…HAME BHAGWAN NE PEHLE HI BETA DE DIYA HOTA, TO HAM AB ISKO RAKH NA LETE… means it is god who must be blamed for this deed,they are truely innocent ,as they think….me jab unlogo ko apne clinic se bahar ka rasta dikhati hu to wo staff se n baki marijo se keh jate hai k..DACTAR JAADA HOSHIYAR NAHI HAI…KAM SEEKHI BHAI HAI..hahahaha
    unke ye lafj vichlit nahi karte par ek baat ujagar karte hai k ham drs. agar isi tarah inko taalenge ,inke cases nahi lenge tabhi ye sabhi jaruraat se jyada hoshiyar log sudhrenge ,jo beti ki hatya ko bhagwan ka gunah batate hai..n i know many of such doctors who never indulge in such practise..thanks to them.
    kuch wo maa baap hai jo apni ladkiyo k liye INSAAF KI JANG me lambi ladai ladne ko tayarr hai or kuch ye bhi hai jo bacchiyo ko paida hone k baki bache 6 mahine bhi nahi dena chahte..asal me aise hi maa baap itni ladkiya maar kar wo sapoot paida karte hai shayad ..jinhe stree sammmaan ki kadr hoti hi nahi..n unki wajah se wo maa baap bhugat te hai jo apni batiyo ko mann se palte hai..jo maa ,bete ki aas me ,apni beti ko maar sakti hai..wo apne naazo se pale usi bete ko kaise samjhaegi ki dusre ki beti k sammaan aur suraksha k kya mayne hai…agar wo maa apne gunah k wakt majboor thi to bete ko kisi galti se rokne k liye bhi majboor hi hogi….MAA kab tak itni majboor bani rahegi,..pata nahi ..aap jaise log bhi koshish to khub kar rahe hai,asar dikh bhi raha hai..par rasta lamba hai.. or usme rukawate hai aise articles…jane ye likhne wale sahab itne comments padhkar ye baat samajh bhi paye hai ya nahi…
    bhagwaan ham sabhi ko nek raste p chalne ka hosla or buddhhi de….aise logo k liye ham KAM HOSHIYAR hi acche hai

    • thanx ! ki apne humare kaam ko pasand kiya.yeh humari pahli koshish hai ki hum songs ke madyam se logoin tak sandesh pahuchayein ki ab tak woh kya galti karte aaye hain / ya barhava dete aaye hain.kai log kisi ki rai ko ansuna kar dete hain par jab kisi gaane ya movie ke madyam se unko apni baat samjhai jati hai to woh kuch had tak sunte to hain….humari kosish se agar ek bhi badla to hamara is song ko banana safal ho jayega..bahut achcha lagta hai ki aaj bhi samaj mein eaise log bhi hain jo is tarah ke kaam ko pasand karte hain.kajal ji humein aap se jurhkar khushi hui.thanx.. aap bhi apni koshish jari rakhein vishvas rakhein ek din samaj bhi badlega…
      “Gulshan”

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